Monday, September 14, 2009

माँ
क्या कहती है माँ मेरी
रहता है मुझे याद कभी ।।
दिल ने दस्तक दी तो हुआ एहसास अभी ,
माँ ............... तू है मेरी रौशनी
माँ ............... तू है मेरी ज़िन्दगी

कुछ कहता तुझेसे पर कहना चाहता हूँ ढेर सी बातें
याद करना चाहता हूँ तेरे गोद में बिताई वो रातें ।।

सोचता हूँ आज भी मैं ,
कैसे समझा होगा तुने
मेरे मुख से निकलती उन आधी अधूरी बातों को

जाने था मैं कितना मासूम शैतान ???
जाने किया तुझे कितना परेशान ????

कुछ याद मुझे , पर याद करना चाहता हूँ ढेर सी बातें
जाने कितनी बार चाँद को मामा बनाया होगा तुने
और ये सुनते ही खिल उठी होगी मेरी दिल की धुनें

मैंने भी खाई होगी अंगुठे की मिठाई
जाने कितनी बार होगी तुने डाट लगाई

मैंने भी किया होगा निंदिया रानी को परेशान
याद नही मुझे तेरी थपकियाँ
याद मुझे यादों के पन्नों का कोई निशान

याद नहीं आता हर वोह लम्हा
जब तक था ये कोमल दिमाग नन्हा

माँ ............ तू है कहाँ
माँ ..............तू है मेरा जहाँ

1 comment:

  1. It's a very very sweet poem..........I really liked the poem......I really appreciate your writting....aise 2-4 aur likhna......aur na kbi friends topic mein bhi poem likhna......

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