माँ
क्या कहती है माँ मेरी
न रहता है मुझे याद कभी ।।
दिल ने दस्तक दी तो हुआ एहसास अभी ,
ओ माँ ............... तू है मेरी रौशनी
ओ माँ ............... तू है मेरी ज़िन्दगी ।
कुछ न कहता तुझेसे पर कहना चाहता हूँ ढेर सी बातें ।
याद करना चाहता हूँ तेरे गोद में बिताई वो रातें ।।
सोचता हूँ आज भी मैं ,
कैसे समझा होगा तुने
मेरे मुख से निकलती उन आधी अधूरी बातों को । ।
न जाने था मैं कितना मासूम शैतान ???
न जाने किया तुझे कितना परेशान ????
कुछ न याद मुझे , पर याद करना चाहता हूँ ढेर सी बातें
न जाने कितनी बार चाँद को मामा बनाया होगा तुने
और ये सुनते ही खिल उठी होगी मेरी दिल की धुनें । ।
मैंने भी खाई होगी अंगुठे की मिठाई
न जाने कितनी बार होगी तुने डाट लगाई । ।
मैंने भी किया होगा निंदिया रानी को परेशान
याद नही मुझे तेरी थपकियाँ
न याद मुझे यादों के पन्नों का कोई निशान । ।
याद नहीं आता हर वोह लम्हा
जब तक था ये कोमल दिमाग नन्हा । ।
ओ माँ ............ तू है कहाँ
ओ माँ ..............तू है मेरा जहाँ । ।
It's a very very sweet poem..........I really liked the poem......I really appreciate your writting....aise 2-4 aur likhna......aur na kbi friends topic mein bhi poem likhna......
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