Sunday, November 8, 2009

खिलेगी ये धरती फिर से
अगर हो साथ तुम्हारा
मिलो जो इस बार हमें  तुम,
खोने न  देंगे दुबारा ...............!!!!!!
मुस्कुरा तू तो साँसें चलें
खिलखिला तू तोह नज़रें खिलें
तू है अम्बर की रौशनी , इन आँखों की नमी भी तू  !!! ऐ सनम ओ सनम!!!!!!


याद न आऊं तुझे ,ऐसा  न करना
याद बन जाऊं मैं ,ये भी न होने देना!!!!!
दुनिया हो एक तरफ और रहें हम साथ
दो दिल की धड़कन हो जब करीब,
झूमेगी ये फिज़ा सारी............
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!

हैं इंसान हम तो ज़स्बात  भी ज़िंदा रखना
हो कोई कितना भी अज़ीज़ , पर  तू मुझे भी मत भूलना
एहसास हो इस दिल की  जान ,
इस एहसास को न खोना
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!

फिज़ा भी कह रही है अपनी दास्तान
दिल हैं जुड़े, तो इतना  तो कर एहसान
गूम होना  पर मिल भी जाना 
रूठ जाना पर मान  जाना
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!

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