खिलेगी ये धरती फिर से
अगर हो साथ तुम्हारा
मिलो जो इस बार हमें तुम,
खोने न देंगे दुबारा ...............!!!!!!
मुस्कुरा तू तो साँसें चलें
खिलखिला तू तोह नज़रें खिलें
तू है अम्बर की रौशनी , इन आँखों की नमी भी तू !!! ऐ सनम ओ सनम!!!!!!
याद न आऊं तुझे ,ऐसा न करना
याद बन जाऊं मैं ,ये भी न होने देना!!!!!
दुनिया हो एक तरफ और रहें हम साथ
दो दिल की धड़कन हो जब करीब,
झूमेगी ये फिज़ा सारी............
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!
हैं इंसान हम तो ज़स्बात भी ज़िंदा रखना
हो कोई कितना भी अज़ीज़ , पर तू मुझे भी मत भूलना
एहसास हो इस दिल की जान ,
इस एहसास को न खोना
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!
फिज़ा भी कह रही है अपनी दास्तान
दिल हैं जुड़े, तो इतना तो कर एहसान
गूम होना पर मिल भी जाना
रूठ जाना पर मान जाना
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!
No comments:
Post a Comment