Thursday, February 18, 2010

JAAN-E-MAN

रात के आँचल की आहट हुई
तेरे सपनो की मुझेसे  मुलाकात हुई
तेरा नाम याद आया , और चहेरे पे मुस्कान की बारिश हुई............
हुआ मैं जान-ऐ-मन , न काबू में रहा ये मन .......


तेरे उन लफ़्ज़ों में जादू था........
हर अंदाज़ में छुपी एक अदा थी.......
छीन लेती जो मेरी नींदें..........
पर छोड़ जाती संग तेरे वो हसीन सपने....!!!!!!!!!


बहती उमगों में तेरे ही गीत सजने लगे......
आते जाते राहों में तू  ही मिलने लगे.........
न जाने क्यूँ  ये  होने लगा......
मैं खुद से ही कहने लगा........
तेरा नाम याद आया ,और  चहेरे को हवा का झोंका छुने लगा...........
हुआ मैं जान-ऐ-मन , न काबू में रहा ये मन ..........


लड़ते  झगड़ते  यूँही रहना तू................
पल में खामोश और पल में हसतें रहना तू........
उड़ते रहे हम इश्क के असमान में........
फिरते रहे  ख्वाबों  के शहरों में  .........
अपनी ही मस्ती की  लेहरों में .......
 गोते लगता हूँ ,
खुद से ही कहता हूँ........
तेरा नाम याद आया ,और दिल के सागर को मिला  टापू
हुआ में जान-ऐ -मन , काबू में न रहा  ये मन..........!!!!!!!!!