Wednesday, November 25, 2009

MASTi

ढूँढ  ज़रा सी मस्ती  ,
खो गयी थी जो यही कहीं,
इन लम्हों में
 रोज़ की  राहों में.
घूम के निकल ,हवा संग चल अब तू ओह यारा.
मौसम  आया संदेसा ले के
बदल रहा है हर पल
रंगों  को  बिखेरते   चल
हसी   उड़ाते चल

हाथ मिला नच ले
मस्ती संग ज़रा सा   तू भी मज़ा  कर ले !!!!!!!!!!!!!!!!

मस्ती मिली तो झूम , न मिली तो थोडा और ढूंड
पर मुस्कुरा , खिलखिला  ,न रो किसी बात पे
तारों पे है कहीं कोई दास्तान छुपी
आसमान पे  कहीं न कहीं लिखी
अपनी भी कहानी.................
न सोच न दिमाग लगा 
आने वाला कल , कल ही आएगा
पर जाने वाला पल तो छुटता ही जायेगा
पकड़  उस पल को कहीं 
ज़रा सी मस्ती ढूंड यहीं ..............


हाथ मिला  नच ले
मस्ती संग ज़रा तू  भी मज़ा कर ले!!!!!!!!!!!!!!!








 

Sunday, November 8, 2009

खिलेगी ये धरती फिर से
अगर हो साथ तुम्हारा
मिलो जो इस बार हमें  तुम,
खोने न  देंगे दुबारा ...............!!!!!!
मुस्कुरा तू तो साँसें चलें
खिलखिला तू तोह नज़रें खिलें
तू है अम्बर की रौशनी , इन आँखों की नमी भी तू  !!! ऐ सनम ओ सनम!!!!!!


याद न आऊं तुझे ,ऐसा  न करना
याद बन जाऊं मैं ,ये भी न होने देना!!!!!
दुनिया हो एक तरफ और रहें हम साथ
दो दिल की धड़कन हो जब करीब,
झूमेगी ये फिज़ा सारी............
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!

हैं इंसान हम तो ज़स्बात  भी ज़िंदा रखना
हो कोई कितना भी अज़ीज़ , पर  तू मुझे भी मत भूलना
एहसास हो इस दिल की  जान ,
इस एहसास को न खोना
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!

फिज़ा भी कह रही है अपनी दास्तान
दिल हैं जुड़े, तो इतना  तो कर एहसान
गूम होना  पर मिल भी जाना 
रूठ जाना पर मान  जाना
ऐ सनम ओ सनम!!!!!!